धनतेरस 2025 कब है | Dhanteras 2025 Date, Puja Vidhi, Muhurat & Katha

7 Min Read

धनतेरस (Dhanteras) हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और पावन त्योहार है, जो दीपावली पर्व की शुरुआत मानी जाती है। यह दिन धन, स्वास्थ्य, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। “धन” का अर्थ है संपत्ति और “तेरस” का अर्थ है त्रयोदशी तिथि। इसलिए इस दिन को “धनत्रयोदशी” भी कहा जाता है।

Dhanteras 2025 में घरों और व्यापारिक स्थानों पर देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। यह पर्व केवल भौतिक धन नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक समृद्धि का भी प्रतीक है। इस दिन सोना, चाँदी, बर्तन, झाड़ू आदि खरीदने की परंपरा है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

Dhanteras 2025: तारीख व मुहूर्त

Dhanteras 2025 date: इस वर्ष धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। यह दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है।

धनतेरस 2025 कब है: शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे

धनतेरस पूजा मुहूर्त 2025 (Dhanteras Puja Muhurat 2025):

शुभ समय: शाम 07:16 बजे से 08:20 बजे तक
प्रदोष काल: 06:55 PM – 08:55 PM
वृषभ काल (लक्ष्मी पूजन हेतु सर्वश्रेष्ठ समय): 07:16 PM – 08:20 PM

धनतेरस पूजा विधि 2025 (Dhanteras Puja Vidhi 2025)

धनतेरस की पूजा विधि बेहद सरल और शुभ मानी जाती है। नीचे बताए गए चरणों का पालन करने से पूजा पूर्ण फलदायी मानी जाती है।

घर की सफाई और सजावट:

  • इस दिन घर की संपूर्ण सफाई करें। मुख्य द्वार पर रंगोली और दीपक सजाएँ।
  • लक्ष्मी माता के स्वागत के लिए दरवाज़े पर आम के पत्तों की तोरण लगाएँ।

भगवान गणेश की पूजा :

  • सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें। उन्हें हल्दी, चावल, पुष्प और मोदक अर्पित करें।
  • मंत्र: “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ…”

लक्ष्मी-कुबेर पूजन :

  • लक्ष्मी माता, कुबेर देव और धन्वंतरि भगवान की मूर्तियाँ या चित्र स्थापित करें।
  • कपूर, धूप, फूल, नैवेद्य और दीप से पूजा करें।
  • मंत्र: “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
  • कुबेर देव के लिए: “ॐ कुबेराय नमः”

दीपदान और यमदीप :

  • रात्रि के समय घर के बाहर और अंदर दीप जलाना अत्यंत शुभ माना गया है।
  • एक विशेष दीप यमराज के नाम का भी जलाया जाता है, जिसे “यमदीपदान” कहा जाता है।

खरीदारी एवं समर्पण :

  • धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तुएँ जैसे सोना, चाँदी, बर्तन या झाड़ू, देवी लक्ष्मी को अर्पित करें।
  • यह क्रिया घर में धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

धनतेरस का महत्व (Dhanteras Ka Mahatva)

धनतेरस का पर्व केवल धन-संपत्ति से जुड़ा नहीं, बल्कि आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक भी है। इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन को “धन्वंतरि जयंती” भी कहा जाता है।

प्रमुख महत्व:

  • स्वास्थ्य की प्राप्ति: भगवान धन्वंतरि की पूजा से रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • धन-संपदा की वृद्धि: लक्ष्मी-कुबेर पूजन से घर में समृद्धि आती है।
  • नया आरंभ: व्यापारी नए खाता-बही या बही-खाते खोलते हैं।
  • दीपावली की शुरुआत: धनतेरस दीपावली की प्रथम कड़ी मानी जाती है।

धनतेरस की कथा (Dhanteras Ki Katha)

एक बार राजा हिम के पुत्र के जन्म के समय यह भविष्यवाणी हुई कि उसकी मृत्यु विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से होगी। राजकुमार की पत्नी अत्यंत बुद्धिमान थी। विवाह के चौथे दिन उसने अपने पति को जाग्रत रखा और कमरे के द्वार पर दीपक, सोना और चाँदी के आभूषण सजाकर रख दिए।

जब यमराज सर्प रूप में वहाँ पहुँचे, तो दीपकों और स्वर्ण आभूषणों की चमक से उनकी आँखें चकाचौंध हो गईं। वे बिना प्रवेश किए वापस लौट गए। इस प्रकार उस दिन से दीपदान की परंपरा आरंभ हुई और यह दिन धनतेरस कहलाया।

इस कथा का भाव है — प्रकाश, भक्ति और सतर्कता से मृत्यु जैसी विपत्ति को भी टाला जा सकता है।

धनतेरस पर क्या खरीदें/क्या न करें

धनतेरस पर क्या खरीदें :

  • सोना और चाँदी — यह दिन सोना खरीदने के लिए सबसे शुभ माना गया है।
  • बर्तन (तांबे, पीतल, स्टील) — घर की समृद्धि और शुभता के प्रतीक हैं।
  • झाड़ू— धन के अपव्यय को रोकने का प्रतीक है।
  • लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ — दीपावली पूजन हेतु खरीदना शुभ होता है।
  • नई वस्तुएँ या इलेक्ट्रॉनिक सामान — घर में नए आरंभ का संकेत देता है।

धनतेरस पर क्या न करें :

  • लोन लेना या उधार देना – यह आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।
  • खाली बर्तन खरीदना – इसे अशुभ माना गया है।
  • कांच, लोहे या धारदार वस्तुएँ खरीदना – नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं।
  • नकारात्मक व्यवहार – इस दिन क्रोध, झगड़ा या अपशब्द नहीं बोलने चाहिए।
  • रात में सोना या दीप न जलाना – इसे अशुभ कहा गया है।
धनतेरस 2025 कब है?

धनतेरस 2025, 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह दीपावली की शुरुआत का दिन है।

धनतेरस 2025 की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

धनतेरस पूजा मुहूर्त 18 अक्टूबर 2025 को शाम 07:16 से रात 08:20 बजे तक रहेगा।

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?

इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, दीपक और नए सामान की खरीदारी शुभ मानी जाती है।

धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?

इस दिन लोहे की वस्तुएं, काले कपड़े या नुकीली चीजें नहीं खरीदनी चाहिए।

धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ है या नहीं?

हाँ, धनतेरस पर सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है। यह लक्ष्मी और कुबेर जी की कृपा पाने का प्रतीक है।

Share This Article
Exit mobile version