Jaya Ekadashi 2025: कब है जया एकादशी व्रत 2025 में, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि महत्व

Ishwar Chand
7 Min Read
Jaya Ekadashi 2025

Jaya Ekadashi 2025: सनातन धर्म में प्रत्येक महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की उपासना के लिए इस दिन व्रत रखा जाता है। माघ माह की शुक्ल पक्ष की जया एकादशी (Jaya Ekadashi 2025) का व्रत जीवन के पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

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जया एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को पढ़ने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन एकादशी का व्रत करने से नीच योनि जैसे भूत, प्रेत, पिचास जैसी योनि मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु के पूजन में पुष्प, अक्षत, रोली, धूप, दीप आदि अर्पित करना चाहिए। क्योकि ऐसा करने से जया एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

Jaya Ekadashi 2025: व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जया एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाकर जीवन को सुख-समृद्धि और शांति से भर देता है। इस दिन विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करने से परिवार में खुशहाली और धन-धान्य की वृद्धि होती है। जया एकदाशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। पूजन में भगवान विष्णु को पुष्प, जल, अक्षत, रोली तथा विशिष्ट सुगंधित पदार्थों अर्पित करना चाहिए। जया एकादशी का यह व्रत बहुत ही पुण्यदायी होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने वाले व्यक्ति को भूत-प्रेत, पिशाच जैसी योनियों में जाने का भय नहीं रहता है।

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Jaya Ekadashi 2025: शुभ मुहूर्त

जया एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 7 फरवरी 2025, रात 09:26 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 8 फरवरी 2025, रात 08:15 बजे
  • व्रत की तिथि: 8 फरवरी 2025 (उदयातिथि के आधार पर)

जया एकादशी व्रत पारण का समय

व्रत पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है।

  • पारण का समय: 9 फरवरी 2025, सुबह 07:04 बजे से 09:17 बजे तक

पारण के बाद दान करने की परंपरा है। अन्न और धन का दान करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।

Jaya Ekadashi 2025: व्रत पूजा विधि

इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और स्तुति की जाती है। इस व्रत की पूजा करने की विधि इस प्रकार है:

  • जया एकादशी के व्रत के लिए उपासक को दशमी के दिन एक ही समय में सात्विक भोजन करना आवश्यक है। व्रती को संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • व्रत के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए, तत्पश्चात भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण अवतार की पूजा करनी चाहिए।
  • रात्रि में जागरण करते हुए श्री हरि के नाम का भजन और कीर्तन करना चाहिए, और द्वादशी के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर दान दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए।

Jaya Ekadashi 2025: व्रत की पौराणिक कथा

भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युद्धिष्ठिर के अनुरोध पर जया एकादशी व्रत के महत्व और उसकी कथा का वर्णन किया, जो पौराणिक मान्यता के अनुसार है। इस कथा के अनुसार:

इंद्र की सभा में एक भव्य उत्सव का आयोजन हो रहा था। सभी देवता, संत और दिव्य पुरुष इस समारोह में शामिल थे। इस अवसर पर गंधर्व मधुर गीत गा रहे थे और गंधर्व कन्याएं मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर रही थीं। इन गंधर्वों में एक गंधर्व का नाम माल्यवान था, जिसकी आवाज़ अत्यंत सुरीली थी और रूप भी उतना ही आकर्षक था। वहीं, गंधर्व कन्याओं में एक नृत्यांगना पुष्यवती भी थी, जो अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती थी। जब पुष्यवती और माल्यवान एक-दूसरे को देखते हैं, तो वे अपनी सुध-बुध खो देते हैं और अपनी लय और ताल से भटक जाते हैं। इस स्थिति से देवराज इंद्र अत्यंत नाराज़ होते हैं और उन्हें श्राप देते हैं कि वे स्वर्ग से वंचित होकर मृत्यु लोक में पिशाचों की तरह जीवन बिताएंगे।

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श्राप के कारण वे दोनों प्रेत योनि में चले गए और दुखों का सामना करने लगे। पिशाच का जीवन अत्यंत कठिन था। दोनों अत्यंत दुखी थे। एक समय माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन आया। पूरे दिन में उन्होंने केवल एक बार फलाहार किया। रात्रि में भगवान से प्रार्थना करते हुए अपने कर्मों पर पछतावा भी कर रहे थे। इसके बाद सुबह तक उनकी मृत्यु हो गई। अनजाने में ही सही, उन्होंने एकादशी का उपवास रखा और इसके फलस्वरूप उन्हें प्रेत योनि से मुक्ति मिली, जिससे वे पुनः स्वर्ग लोक में लौट गए।

Jaya Ekadashi 2025: व्रत उपाय

जया एकादशी का व्रत रखने से यह धार्मिक विश्वास है कि मनुष्य के सभी कार्य सफल होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह माना जाता है कि जो व्यक्ति जया एकादशी के दिन तुलसी का विशेष उपाय करता है, भगवान विष्णु उसकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं।

आइये जानते है जया एकादशी व्रत के किये जाने वाले कुछ खास उपाय के बारे में जैसे :

  • धार्मिक परंपरा के अनुसार, जया एकादशी के दिन तुलसी का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी कारण भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते विशेष प्रिय हैं।
  • यह मान्यता है कि जया एकादशी के अवसर पर अपने घर की पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए।
  • इसके पश्चात, जया एकादशी व्रत के अगले दिन सुबह तुलसी के पौधे को धूप, दीप, अगरबत्ती, फल-फूल, नवैद आदि अर्पित करके उनकी पूजा करनी चाहिए।
  • इसके बाद तुलसी मंत्र का जाप करें और जल अर्पित करें। जल अर्पित करने के उपरांत तुलसी के पौधे की 11 बार परिक्रमा करें। अंत में तुलसी जी की आरती करें और शाम को तुलसी के पास जाकर दीपक जलाकर ॐ भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करें।
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